महाभारत’ के इंद्रदेव याद हैं? उथल-पुथल भरी रही पंजाब के अमिताभ बच्चन की जिंदगी, दर्द और संघर्ष में कटे आखिरी दिन
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के अमिताभ बच्चन के नाम से मशहूर रहे ‘महाभारत’ के ‘इंद्रदेव’ यानी सतीश कौल के अंतिम दिन काफी मुश्किल और संघर्षों से भरे रहे। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें इंडस्ट्री से मदद भी मांगनी पड़ी थी।
बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ भारतीय टेलीविजन के सबसे सफल पौराणिक धारावाहिकों में से एक रहा है। इस पौराणिक धारावाहिक से कई कलाकारों को पॉपुलैरिटी मिली है, फिर वे चाहे कर्ण की भूमिका में नजर आए पंकज धीर रहे हों, द्रौपदी की भूमिका में दिखाई दीं रूपा गांगुली रही हों, श्रीकृष्णा के किरदार में दिखाई दिए नितीश भारद्वाज या फिर भीष्म पितामह की भूमिका में दिखाई दिए मुकेश खन्ना। इस पौराणिक धारावाहिक में ‘इंद्रदेव’ का किरदार निभाने वाले सतीश कौल को भी खूब लोकप्रियता मिली। बॉलीवुड में भले ही वह कोई खास मुकाम हासिल न कर पाए हों, लेकिन पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार थे। उन्हें पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन कहा जाता था। लेकिन, इतनी शोहरत के बाद भी सतीश कौल की जिंदगी के आखिरी दिन काफी मुश्किलों भरे रहे।
कश्मीर में हुआ था जन्म
सतीश कौल का जन्म सितंबर 1946 को कश्मीर में हुआ था, जिन्होंने अभिनय के चलते मायानगरी का रुख किया और फिर बेशुमार सफलता और लोकप्रियता भी हासिल की। सतीश कौल के पिता का नाम मोहन लाल कौल था, जो खुद एक जाने-माने कश्मीरी कवि थे। उन्होंने श्रीनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर अभिनय का सपना पूरा करने के लिए पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में एडमिशन ले लिया।
डैनी डेन्जोंग्पा और शत्रुघ्न सिन्हा के रहे सहपाठी
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में पढ़ाई के दौरान सतीश कौल, डैनी डेंग्जोंग्पा, जया बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे स्टार्स के सहपाठी रहे। फिर 70 के दशक में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखे। अपने भोले चेहरे और भावुक भूमिकाओं के चलते जल्दी ही वह दर्शकों के पसंदीदा बन गए और पंजाबी सिनेमा में अपने अभिनय का सिक्का चलाया। पंजाबी सिनेमा में उनके स्टारडम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन कहा जाता था।
इन फिल्मों में किया काम
सतीश कौल की पंजाबी फिल्मों की बात करें तो उन्होंने ‘पटोला’, ‘इश्क निमाना’, ‘सुहाग चूड़ा’, ‘सस्सी पन्नू’ और ‘शेरा दे पुत्त शेर’, ‘मौला जट्ट’ जैसी फिल्मों में अभिनय से सुर्खियां बटोरीं। चार दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने पंजाबी सिनेमा में अपने नाम का सिक्का चलाया और दर्शकों के दिल पर किया। हिंदी फिल्मों में भी सतीश कौल ने काम किया। उन्हें ‘प्यार तो होना ही था’, ‘कमांडो’, ‘कर्मा’, ‘वॉरंट’ और ‘राम लखन’ जैसी फिल्मों में देखा गया। लेकिन, हिंदी से ज्यादा पंजाबी सिनेमा में उन्हें दर्शकों ने पसंद किया।
महाभारत में निभाया इंद्र देव का किरदार
यूं तो सतीश कौल ने कई हिंदी और पंजाबी फिल्मों में काम किया, लेकिन उनके करियर के लिए जो शो वरदान साबित हुआ वह था बीआर चोपड़ा का पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’, जिसमें उन्होंने इंद्रदेव की भूमिका निभाई थी। फिर वह ‘विक्रम बेताल’ और शाहरुख खान स्टारर ‘सर्कस’ में भी नजर आए। लेकिन, इतनी लोकप्रियता के बाद भी सतीश कौल की जिंदगी के आखिरी दिन काफी संघर्षों से भरी रही। शादी के कुछ साल बाद ही उनका तलाक हो गया और पत्नी के साथ बेटा भी दूर चला गया।
स्कूल हुआ बंद, ढाई साल बिस्तर पर गुजारे
2011 में सतीश मुंबई छोड़कर लुधियाना आ गए और यहां एक एक्टिंग स्कूल शुरू किया, लेकिन ये भी बंद हो गया। 2015 में दुर्भाग्यवश उनका कूल्हा टूट गया और फिर ढाई साल तक वह बिस्तर में रहे। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ गया। इसी बीच अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में अपना दर्द बयां किया और फिल्म इंडस्ट्री से मदद मांगी और 10 अप्रैल, 2021 को 74 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
